बिजली में बने आत्मनिर्भर, प्रदेश को भी दे रहे

बिजली में बने आत्मनिर्भर, प्रदेश को भी दे रहे

 

देवीशंकर सुथार

प्रतापगढ़ जिले की ऊंचाई समुद्रतल से 491 मीटर पर होने से हवा के वेग अधिक होने को देखते हुए यहां पवन ऊर्जा का अच्छा उत्पादन हो रहा है।कुल उत्पादन हो रही बिजली जिले की आपूर्ति के बाद बिजली को प्रमुख लाइनों में समाहित हो जाती है। ऐसे में एक तरह से कांठल बिजली क्षेत्र बिजली को लेकर आत्मनिर्भर है, वहीं बची बिजली प्रदेश को भी बिजली दी जा रही है।
गौरतलब है कि जिले को वर्तमान में सामान्यत: 75 मेगावाट बिजली की खपत होती है। वहीं कृषि की सीजन में यह आवश्यकता दोगुनी हो जाती है। इससे करीब चार माह तक अधिकतम डेढ़ सौ मेगावाट बिजली की आवश्यकता रहती है।वहीं प्रतापगढ़ जिले में लगे पवन ऊर्जा संयंत्र से बिजली का उत्पादन साढ़े तीन सौ मेगावाट है।
यह होता हैउत्पादन
जिले में चार कम्पनियों के 340 पवन ऊर्जा संयंत्र लगे हुए है। जो अधिकतम 354.75 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर सकते है।ये संयंत्र धमोतर, देवगढ़, दलोट क्षेत्र में लगे हुए है।जिले में सबसे पहला संयंत्र देवगढ़ में 8 मार्च 2001 में लगाया गया था।
एक संयंत्र की क्षमता
पवन उर्जा संयंत्र अलग-अलग क्षमता के लगे हैं। प्रतापगढ़ में डेढ़ से दो मेगावाट तक के संयंत्र लगे हैं। एक मेगावाट संयंत्र पूरे साल में लगभग बीस-पच्चीस लाख यूनिट बिजली उत्पादित कर सकता है।
यहां से जाती है बिजली
प्रतापगढ़ में उत्पादन होने वाली बिजली को 220 केवी जीएसएस में प्रवाहित की जाती है।इसके बाद जिले में आपूर्ति होती है।यहां से जीएसएस से जुड़ी निम्बाहेड़ा की लाइनों में प्रवाहित की जाती है।
यह है जिले में आपूर्ति की व्यवस्था
जिले में विद्युत प्रसारण निगम की ओर से पांच जीएसएस लगे है।इसमें मोखमपुरा में 132, दलोट में 132, प्रतापगढ़ में 220, धरियावद 132, छोटीसादड़ी में 132 केवी जीएसएस लगे हुए है।इनसे बिजली की आपूर्ति की जाती है।
जिले में 214 पवन चक्कियां
प्रतापगढ़ जिले में अभी तक कुल 214 पवन चक्कियां लगी हुई है। इसमें प्रतापगढ़ क्षेत्र में रिजन पावर प्रथम की पवन चक्कियों से 51, द्वितीय से 51 और वेलस्पन से 106.8 मेगावाट, देवगढ़ में एनईजी माइकोन से 2.25 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। इसी प्रकार दलोट क्षेत्र में रिजन पावर से क्रमश: 49.5, 45, 15 और वंडर कम्पनी से 15 मेगावाट बिजली के पवन ऊर्जा संयंत्र लगे है।

हवा का अच्छा दवाब, हो रहा उत्पादन
प्रतापगढ़ जिले की भौगोलिक परिस्थितियां पवन ऊर्जा के लिए अनुकूल है। यहां वर्तमान में विभिन्न कम्पनियों के कुल 214 संयंत्र लगे हुए है। इनसे 354.75 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो सकता है।जिले में सीजन के समय 150 मेगावाट बिजली की खपत होती है, जबकि अन्य समय में 75 मेगावाट बिजली की आवश्यकता होती है।ऐसे में इससे अधिक उत्पादन होने वाली बिजली को मुख्य लाइनों में प्रवाहित हो जाती है, जो प्रदेश के मुख्य सिस्टम में मिल जाती है।
रमेश पुरोहित
अधिशासी अभियंता, राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम, लिमिटेड, प्रतापगढ़